उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढता ही जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 1032 तक पहुँच गई है। 32 लोगों की मौत की पुष्टी सरकार कर रही है। पिछले 24 घंटे में 119 नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पहचान हुई है। राजधानी लखनऊ की बात करें तो 24 घंटे में 85 मरीजो स्वाइन फ्लू पाया गया है। अकेले लखनऊ में ही अभी तक कुल 619 मरीज स्वाइन फ्लू से पीड़ित है। हॉस्पिटलों में स्वाइन फ्लू से लड़ने की तैयारियां बहुत कम है। स्वाइन फ्लू किट की उपलब्धता भी हॉस्पिटलों में क्षमता से कम है। सरकार ने इसके खतरे को देखते हुए डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी है। यह सरकारी आंकड़े है। वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते है?

स्वाइन फ्लू के नाम पर प्राइवेट हॉस्पिटल और डाइग्नोसिस सेंटर चांदी काट रहे है। कुछ मरीजों ने बताया कि जाँच के नाम पर 4 से 5 हजार रूपये वसूल रहे है। सरकारी हॉस्पिटल में यह जाँच मुफ्त है। लेकिन सरकारी हॉस्पिटलों में जाँच कीटों की कमी है।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू का वायरस सुअरों से इंसान में फैलता है। सूअरों में उपस्थित वायरस ए1एन1 वायरस इंसानों में आता है उन्हें संक्रमित करता है। छीकने, खांसने या ऐसी चीजों को टच करने से जिसे कई लोग इस्तेमाल करते है या जिस को संक्रमित व्यक्ति उपयोग कर चुका है वह दूसरे लोगों को संक्रमित करती है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा की तरह ही होते है। बुखार, तेज ठण्ड लगना, झुकाम और खांसी होना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द, सिरदर्द और कमजोरी है तो ये स्वाइन फ्लू के लक्षण हो सकते है।
स्वाइन फ्लू से बचाव
स्वाइन फ्लू का बचाव केवल सावधानी रख कर ही किया जा सकता है। जब भी खाँसे या छीकें मुँह पर रुमाल रखें। भीड़ वाले स्थानों पर कम जाएं। यदि जायें तो मास्क लगाएं। बार बार हाथ साबुन से या सोल्युशन से साफ करें। यह संक्रमण सार्वजिनक इस्तेमाल की चीजों जैसे नल की टोंटी, किबाड़ का हैंडल, रिसीवर या अन्य चीजों को छूने और हाथ को नाक से लगाने से भी फैल सकता है। इसलिए सावधानी ही बचाव है।

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