गोरखपुर में पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज में 30 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। मीडिया ने ऑक्सीजन की कमी से मौत होने की खबर चलाई। प्रशासन ने कहा कि एन्सेफलाइटिस की वजह से मौत हुई है। 12 अगस्त को सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए। मजिस्ट्रेट जाँच रिपोर्ट में साफ हो गया है कि ऑक्सिजन संकट के कारण बच्चों की मौत हुई है, इस रिपोर्ट में प्रिंसिपल और डॉक्टरों को दोषी ठहराया गया है। राज्य सरकार को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में गोरखपुर जिला प्रशासन ने कहा है कि ऑक्सिजन संकट के कारण 10 अगस्त और 11 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एन्सेफलाइटिस और नवजात वार्ड में भर्ती कुछ बच्चों का निधन हो गया है। हालांकि, यहां पर शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने ऐसी रिपोर्ट पर टिप्पणी करने या पुष्टि करने से इनकार कर दिया।

राज्य सरकार ने 12 अगस्त को मौत की एक मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया था। गोरखपुर डीएम राजीव रौतेला को जांच पूरी करने और मुख्य सचिव को अपनी रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था। रौतेला जाँच कर अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और मेडिकल कॉलेज के क्लर्कों पर आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार डीएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी और लापरवाही दोनों ही बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार है। रिपोर्ट में कहा गया है की ऑक्सीजन सप्लायर ग्रुप फॉर्म पुष्पा सेल प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ द्वारा लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित की गई जिसके लिए वह जिम्मेदार है। जो इनके जीवन रक्षक कार्य को देखते हुए नहीं किया जाना था। इसके अलावा डॉक्टर कफील खान का जिक्र अभी इस इस रिपोर्ट में किया गया है

रिपोर्ट में डॉक्टर सतीश एचओडी एनेस्थेसिया पर आरोप लगाया है कि वे 11 अगस्त से बिना लिखित अनुमति के बी आर डी मेडिकल कॉलेज से अनुपस्थित है। डॉक्टर सतीश लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए भी प्रभारी हैं । डॉक्टर सतीश को अपने दायित्वों का सम्यक निर्वहन ना करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। इस रिपोर्ट में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को भी दोषी बताया गया है
उन पर आरोप है कि आसन्न ऑक्सीजन संकट से वे अवगत थे लेकिन चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में वरिष्ठ अधिकारियों को सतर्क करने में असफल रहे। साथ ही राजीव मिश्रा को ऑक्सीजन सप्लायर को भुगतान न करने का भी दोषी माना गया है

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